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गरीबों को कंपनियों द्वारा लूटे जाने के विरोध में कांग्रेस करेगी आंदोलन: लल्लू

लल्लू ने की सपा और बसपा से अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग

लखनऊ, सोशल टाइम्स। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा कि लाखों गरीबों को सहारा जैसी कंपनियों द्वारा लूटे जाने और योगी सरकार के इस पर चुप्पी साधने को लेकर कांग्रेस पार्टी आंदोलन करेगी। उन्होंने मामले में सपा और बसपा जैसे विपक्षी दलों से भी अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की।

लल्लू ने रविवार को प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि सहारा इंडिया ग्रुप में छोटे-छोटे दुकानदार, रेहड़ी, ठेला-पटरी चलाने वाले गरीब, मध्यमवर्गीय मजदूर, महिलाएं, घरेलू काम करने वाली महिलाओं ने किस्तों में 10 रुपये से लेकर सैकड़ों रुपये तक का आरडी खाता खुलवाया था। साथ ही कई सारे लोगों ने फिक्स डिपॉजिट भी किया मगर मियाद पूरी होने के बावजूद उनका पैसा नहीं मिल पा रहा है। इन गरीबों ने अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई व घर परिवार में किसी भी छोटे-बड़े काम के लिए पैसा जमा किया था लेकिन अब वे सब लुटे हुए महसूस कर रहे हैं। इन कम्पनियों में बड़ी संख्या में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लोगों के पैसे फंसे हुए हैं।

लल्लू ने कहा कि सरकार के पास ऐसा कोई डाटा या सूची नहीं है जिससे यह पता चल पाये कि प्रदेश के कितने लोगो का कितना पैसा फँसा है। प्रदेश का ऐसा कोई जिला, कस्बा, गांव अछूता नहीं है, जहाँ ग़रीब और सामान्य लोगों का पैसा सहारा में न फँसा हो। गरीब लोग रोज बैंकों का चक्कर लगा रहे हैं, मियादें पूरी हो गई हैं पर पैसा नहीं मिला है। इंसेंटिव के चक्कर में जिन जमाकर्ताओं ने लोगों से पैसा जमा कराया, उनके साथ मार-पीट की घटनाएं हो रही है। तमाम जमाकर्ता घर छोड़कर भाग गए, कितनों ने आत्महत्या भी कर ली है। आखिर योगी सरकार गरीबों को उनका पैसा वापस दिलाने के लिए क्या कर रही है ? सपा-बसपा भी इस मसले पर अपना स्टैंड क्लियर करे।

उन्होंने सरकार पर आरोप लगते हुए कहा कि गरीब व सामान्य स्तर के लोगों ने बेहतर भविष्य व बेटियों की शादी आदि के लिये अपनी कमाई सहारा में जमा कराया, निश्चित मियाद पूरा होने के बाद भी सालों से उनका पैसा वापस नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने पर्ल्स ग्रुप मामले पर बात करते हुए कहा कि कंपनी PACL लिमिटेड की भी यही कहानी है, इस रियल स्टेट की कंपनी में प्लाटिंग व हाउसिंग की स्कीम के तहत पैसा जमा किया गया। सेबी ने 22 अगस्त 2014 को इसे बंद कर दिया। सेबी ने आरोप लगाया कि RD, FD के नाम पर कंपनी लोगों से अवैध तरीके से पैसा ले रही है। इसमें टोटल निवेशक 5.85 करोड़ हैं, जबकि टोटल देनदारी 49 हजार 100 करोड़ रुपया है। 2 फरवरी 2016 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा कमेटी व सेबी को 6 माह पैसा भुगतान करने का आदेश दिया जबकि 6 वर्षों में भी आज तक सिर्फ 2 प्रतिशत लोगों का अधूरा भुगतान किया गया है। पर्ल्स कंपनी के ऑफिसों में 50 प्रतिशत से अधिक पॉलिसी जमा हैं। सेबी उन पॉलिसियों का भुगतान करने से मना कर रही है। लोगों के पास ऑफिस द्वारा दी गई पावती है। पॉलिसी को सेबी स्वीकार नहीं कर रही है। पावती वाले छोटे-छोटे वर्ग के लोग हैं।