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गणेश शंकर पाण्डेय, विनय शंकर तिवारी हुए समाजवादी पार्टी में शामिल

सपा की किन्नर प्रकोष्ठ का गठन,पायल किन्नर होंगी अध्यक्ष

लखनऊ, सोशल टाइम्स। विधान परिषद के पूर्व सभापति गणेश शंकर पाण्डेय और गोरखपुर के चिल्लूपार से विधायक विनय शंकर तिवारी ने समाजवादी पार्टी की सदस्य्ता ग्रहण कर ली है। इसे अलावा बसपा छोड़कर आए पूर्व सांसद भीष्म शंकर तिवारी उर्फ कौशल तिवारी, ब्लाक प्रमुख लक्ष्मीपुर गोरखपुर संतोष पाण्डेय, बसपा के पूर्व प्रत्याशी संजय दीक्षित, फतेहपुर सदर से पूर्व प्रत्याशी बसपा समीर त्रिवेदी, गोण्डा कर्नैलगंज के पूर्व बसपा प्रत्याशी संतोष तिवारी सहित बसपा के कई पदाधिकारी, कई पूर्व प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य तथा प्रधान भी समाजवादी पार्टी के सदस्य बने।

रविवार को समाजवादी पार्टी की नीतियों और अखिलेश यादव के नेतृत्व से प्रेरित होकर बड़ी संख्या में बसपा, भाजपा, आम आदमी पार्टी तथा कांग्रेस के वरिष्ठ एवं प्रमुख नेता समाजवादी पार्टी में अपने हजारों समर्थकों के साथ शामिल हो गए। बुन्देलखंड इंसाफ सेना, निषाद सेना एवं मान्यवर कांशीराम सर्वसमाज सेना ने समाजवादी पार्टी में विलय कर दिया।

खलीलाबाद के भाजपा विधायक जय चौबे, अजय दूबे, विक्रम दुबे, इटावा के पूर्व जिला मंत्री शिव कुमार निषाद भी अपने तमाम साथियों के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। पूर्व विधायक कुशीनगर आनन्द शर्मा, शिवेन्द्र पाण्डेय अधिवक्ता, आम आदमी पार्टी बरेली के जिला सचिव शिव औतार शर्मा, योगेन्द्र शर्मा अध्यक्ष फोनरवा गौतमबुद्धनगर भी सपा में शामिल हुए। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य जलालुद्दीन सिद्दीकी ने भी कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली। वहीं मनोज चौधरी ने अपनी पार्टी का विलय कर दिया। मूलचरन निषाद बसपा छोड़कर सपा में शामिल हुए। आनन्द निषाद राष्ट्रीय अध्यक्ष ने निषाद सेना, श्री ए.एस. नोमानी राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बुन्देलखंड इंसाफ सेना बांदा तथा मान्यवर कांशीराम सर्व समाज सेना गाजियाबाद के राष्ट्रीय अध्यक्ष बोबी अन्ना ने समाजवादी पार्टी में विलय की घोषणा की।

इसी के साथ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा किन्नर पायल को समाजवादी किन्नर सभा उत्तर प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष नामित किया गया है। इस दौरान अखिलेश यादव ने नए साथियों के आने का स्वागत करते हुए कहा कि जनता ने भाजपा के सफाये का मन बना लिया है। समाजवादी पार्टी में शामिल होने वाले तमाम नेताओं ने संकल्प लिया कि वे विधानसभा चुनाव 2022 में होने वाले चुनावों में समाजवादी पार्टी को बहुमत दिलाने और अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।