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योगी आदित्य़नाथ की अर्थव्यवस्था की समझ शून्य: चिदंबरम


लखनऊ, सोशल टाइम्स। देश के पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि अर्थव्यवस्था को लेकर यूपी के मुख्यमंत्री की समझ शून्य है, इसी वजह से संसाधनों की दृष्टि से बेहद संपन्न उत्तर प्रदेश में हर ओर बदहाली है। योगी आदित्यनाथ के शासन का मॉडल तानाशाही,धार्मिक विद्वेष, जातिवाद, महिलाओं के प्रति हिंसा और पुलिसिया उत्पीड़न का सम्मिश्रण है। यूपी के लोगों को सोचना चाहिए कि वे कैसी सरकार के लिए वोट दे रहे हैं। यूपी को बदहाली से सिर्फ़ कांग्रेस निकाल सकती है। उत्तर प्रदेश के भविष्य की बेहतरी के लिए पूरी ताक़त से जुटीं पार्टी महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी के ‘‘लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ’’ अभियान ने पूरे भारत की महिलाओं को एक नयी ऊर्जा दी है। यूपी के लोगों से निवेदन है कि वे कांग्रेस को वोट देकर एक नये युग की शुरूआत करें।


उत्तर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर रविवार को प्रेस कान्फ्रेंस को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा कि उत्तर प्रदेश भारत में सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और यहां के लोग भारत के सबसे मेहनती भी हैं लेकिन यह ग़रीबी के दलदल में धंसा हुआ है। पिछले पांच वर्षों में यूपी की जीएसडीपी विकास दर 2016-17 में 11.4 प्रतिशत से घटकर 2020-21 में -6.4 प्रतिशत हो गई है। यूपी की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत के आधे से भी कम है। योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में प्रति व्यक्ति आय में 1.9 प्रतिशत की गिरावट आई है। राज्य का कुल कर्ज 6 लाख 62 हजार 891 करोड़ रुपये है जो कि जीएसडीपी का 34.2 प्रतिशत है और उसमें भी 40 प्रतिशत कर्ज तो अकेले योगी आदित्यनाथ कार्यकाल में जुड़ा है। नीति आयोग द्वारा जारी बहुआयामी गरीबी सूचकांक के अनुसार प्रदेश की 37.9 प्रतिशत आबादी गरीब है। 12 जिलों में यह अनुपात 50 प्रतिशत से अधिक है, वहीं 3 जिलों (श्रावस्ती, बहराइच और बलरामपुर) में यह 70 प्रतिशत से अधिक है।


उन्होंने कहा कि यूपी में बेरोजगारी दर देश में सबसे ज्यादा है। अप्रैल 2018 से 15 से 29 आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी दर दो अंकों में रही है जो राष्ट्रीय दर से ऊपर है। अप्रैल 2018 और मार्च 2021 के दौरान शहरी क्षेत्रों में हर चार में से एक युवा बेरोजगार था। सरकार में बड़ी संख्या में रिक्तियां हैं और सरकार पैसे की कमी के कारण उन्हें नहीं भर रही है। यूपी से दूसरे राज्यों में जाने वाले प्रवासियों की संख्या लगभग 12.3 मिलियन है, यानी यूपी से संबंधित 16 व्यक्तियों में से एक यूपी से बाहर जा रहा है।


उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों की स्थिति दयनीय है। यूपी को शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए 2 लाख 77 हजार शिक्षकों की जरूरत है। यहां का छात्र-शिक्षक अनुपात सभी राज्यों में सबसे खराब है। आठ में से एक छात्र कक्षा 8 तक स्कूल छोड़ देता है। कॉलेज या विश्वविद्यालय स्तर पर सकल नामांकन अनुपात 26.3 प्रतिशत है।


पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश का नवजात मृत्यु दर 35.7 प्रतिशत है, शिशु मृत्यु दर 50.4 प्रतिशत है और पांच साल से कम के बच्चों का मृत्यु दर 59.8 प्रतिशत है - जो राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है। यूपी में एक हज़ार लोगों के लिए एक डॉक्टर भी नहीं है। डॉक्टरों का अनुपात 0.64 है, नर्सों का अनुपात 0.43 है, और पैरामेडिक्स का अनुपात 1.38 है - यह सभी राष्ट्रीय औसत से ऊपर है। जिला अस्पतालों में प्रति एक लाख की आबादी पर मात्र 13 बेड हैं। 2019-20 के नीति आयोग के स्वास्थ्य सूचकांक में उत्तर प्रदेश देश के सभी प्रदेशों मे सबसे नीचे रहा है।


पी.चिदंबरम ने कहा कि वे पिछले पांच सालों लगातार बदहाली की ओर बढ़ते उत्तर प्रदेश के मतदाताओं से सम्मानपूर्वक पूछना चाहते हैं कि वे किस लिए मतदान कर रहे हैं? योगी सरकार के शासन का मॉडल पूरी तरह से तानशाही, धार्मिक घृणा को बढ़ावा देना वाला, जातिगत दुश्मनी को बढ़ावा देना वाला, पुलिस द्वारा अत्याचारों और लैंगिक हिंसाओं का सम्मिश्रण है जिसने राज्य व राज्य की जनता के अधिकांश लोगों को गरीब बना दिया है।


उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समझ शून्य है। उत्तर प्रदेश को आर्थिक एवं अन्य सभी मोर्चों पर मजबूत बनाने के लिए जनता को सत्ता बदलनी पड़ेगी। पूरा देश इस समय कांग्रेस की ओर आशा भरी निगाह से देख रह है। उत्तर प्रदेश के लोगों से वे अपील कर रहे हैं कि कांग्रेस को वोट देकर उसे ताक़त दें।