• सम्पादक

नकारत्मक सोच से दूर रहें युवा: अली अब्बास


फोटो: सैयद अली अब्बास

साक्षात्कार। आईपीएस सैयद अली अब्बास लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में एसीपी के पद पर तैनात हैं। अब्बास का चयन 2018 बैच में हुआ था। प्रतापगढ़ जिले में प्रोबेशन पीरियड से शुरुआत के बाद वह सहारनपुर में भी एएसपी के तौर पर तैनात रहें। उनके जीवन से जुड़े किस्से और सफर पर हमारे संपादक शुभांकर भानु ने उनसे बात की, पेश है बातचीत का पूरा अंश.....

सवाल: बचपन कैसी परिस्थितियों में बीता, आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि कैसी थी? जवाब: मैं अयोध्या का रहने वाला हूं। ददिहाल अयोध्या का है, राम जन्मभूमि के बगल में ही मेरा घर था। पिता जी और माता जी दोनो नौकरीपेशा थें। मां एक अध्यापिका थीं। सवाल: आपने शिक्षा कहां से ग्रहण की? जवाब: मेरी शुरुआती पढ़ाई बहराइच में हुई। बहराइच पूरे प्रदेश में साक्षरता के मामले में निचले स्तर पर आता है, इस कारण से वहां पढ़ना थोड़ा मुश्किल था। लेकिन मैं भाग्यशाली था कि मेरे माता पिता ने मेरा दाखिला अंग्रेजी माध्यम स्कूल में करा दिया। जिसके बाद मैने अपनी 12वीं भी बहराइच से की। अपनी स्नातक की पढ़ाई मैने लखनऊ की इंटीग्रल यूनिवर्सिटी से पूरी की, जिसके बाद मैं परीक्षाओं की तैयारी में जुट गया। सवाल: आपको पुलिस अधिकारी बनने की प्रेरणा कहां से मिली? जवाब: जब मैं अपने ग्रेजुएशन के दिनों में था तो मुझे लगता था कि अभी तक जीवन में मैने कुछ मेहनत नहीं की। क्योंकि जीवन में कभी प्रतिस्पर्धा देखी नही थी। मुझे लगता था कि नौकरी तो मिल जाएगी लेकिन हमेशा कोई मध्यमवर्गी कार्य करते रहेंगे। हालांकि कोई कार्य बुरा नही होता लेकिन अंदर से हमेशा लगता था कि कुछ बड़ा करना है, जिससे मुझे सिविल सर्विसेज की प्रेरणा मिली। सवाल: क्या पढ़ाई के अलावा आपकी कोई हॉबी भी रही है? जवाब: हॉबी को मैं सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा समझता हूं जीवन का। जब मैं तैयारी करता था तो रोज एक घंटा क्रिकेट जरूर खेलता था। क्रिकेट का बहुत शौक था, यूनिवर्सिटी की टीम से भी खेलता था। इससे स्ट्रेस में काफी आराम मिलता है। सवाल: आपकी पहली पोस्टिंग और उसका अनुभव ? जवाब: मैने 2017 में एग्जाम दिया था, 2018 बैच में मेरा चयन हो गया था। मेरी पहली पोस्टिंग सहारनपुर थी। मैं वहां एएसपी के पद पर 6 महीने तक तैनात रहा। इससे पहले प्रोबेशन पीरियड में मैं प्रतापगढ़ में पोस्टेड रहा। जब आप एक अधिकारी के तौर पर पहुंचते है नतो आप पर बहुत सारी जिम्मेदारियां होती हैं। हालांकि आईपीएस बनने से पहले मैं बैंक में मैनेजर था तो जिम्मेदारियां लेना मुझे भली भांति आता था। मैने वहां लोगो की सहायता के लिए कार्य किया। सवाल: करियर के शुरुआती दौर में लखनऊ जैसी वीआईपी पोस्टिंग, क्या आपको कोई प्रेशर महसूस हुआ? जवाब: लखनऊ की पोस्टिंग की अपनी चुनौतियां होती है। एक प्रेशर ये भी रहता है कि सारे सीनियर, उच्च न्यायलय और तो और सब नेता मंत्री सब लखनऊ में ही रहते है। लेकिन इसको प्रेशर से ज्यादा चुनौती समझने की जरूरत होती है। अगर आप क्लीन काम करते है तो आपको कोई डर नही रहता है। सवाल: अब तक के सफर का कोई ऐसा किस्सा जो आप कभी नही भूलते? जवाब: पुलिस की नौकरी में आए दिन नए किस्से होते रहते हैं। लेकिन एक किस्सा मैं बताना चाहूंगा जब मैं प्रतापगढ़ में पोस्टेड था। उस समय कोरोना काल चल रहा था, सरकार ने एक पहल की थी जिससे लोगो को ट्रेन के माध्यम से घर लाया जा रहा था। मेरी ड्यूटी के दौरान मुझे पता चला कि एक ट्रेन आने वाली है जिसमे 9 महीने की गर्भवती महिला है जो किसी भी वक्त जन्म दे सकती हैं। इस वक्त मैं तुरंत सीएमओ साहब से बात करके डॉक्टर को लेकर स्टेशन पर पहुंचा। प्लेटफॉर्म से स्ट्रेचर के माध्यम से महिला को बाहर पहुंचाया। और आप विश्वास नहीं करेंगे कि जैसे ही एंबुलेंस आई महिला ने बच्चे को जन्म दिया। सवाल: आप युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे? जवाब: युवाओं को अपने आप को बेहतर करने का प्रयास सदैव करते रहना चाहिए। मैं उन्हें ये संदेश देना चाहूंगा कि किसी भी तरह की नकारत्मक सोच को अपने से दूर रखे। और मन में कोई भी पक्षपात के विचारो को ना बैठाए। मन में कोई भी शंका ना बैठाए, मैने करीब हर सरकारी परीक्षा दी है और उसे पास किया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण चीज सिर्फ ये है कि आपको अपने पर भरोसा होना चाहिए। और अगर आप अपने लक्ष्य की ओर केंद्रित हैं तो जरूर सफलता प्राप्त करेंगे। यदि लक्ष ना भी प्राप्त हो तो हतोसहित होने की जरूरत नहीं है। जो कार्य अच्छा करता है उसकी सराहना होती है।